तलाक़ पर हस्ताक्षर किए, अब वह घुटने टेककर भीख माँग रहा है

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अध्याय 108

उसी पल अमेलिया उठ खड़ी हुई। उसने मेज़ से अपना वाइन ग्लास उठाया और चेहरे पर फिर से एक “ठीक-ठाक” मुस्कान सजा ली।

लेकिन जैसे भी देखो, वह मुस्कान बनावटी ही लग रही थी।

फिर भी उसकी बातों में छुपा हुआ मतलब था, “जेम्स, हमें बहुत खुशी है कि तुम सोफिया को हमसे मिलवाने लाए। इससे पता चलता है कि तुमने सच में उ...

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